नई दिल्ली | 4 जनवरी, 2026: भारत के लिए तकनीकी मोर्चे पर आज दो बड़ी और विरोधाभासी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जहाँ देश सेमीकंडक्टर (Semiconductor) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के करीब है, वहीं दूसरी तरफ IT सेक्टर में नौकरियों की कमी युवाओं को परेशान कर रही है।
1. 2026 होगा ‘चिप रिवॉल्यूशन’ का साल: 4 नए प्लांट्स तैयार
भारत अब विदेशी कंपनियों पर चिप्स के लिए निर्भर नहीं रहेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के ताजा बयान के अनुसार, साल 2026 भारत के लिए ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि देश के 4 बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट्स कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) शुरू कर देंगे।
- टाटा और माइक्रोन का जलवा: गुजरात के साणंद और असम में लग रहे Tata Electronics और Micron के प्लांट्स में चिप्स का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
- आत्मनिर्भर भारत: इससे स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और डिफेंस उपकरणों में लगने वाली चिप्स भारत में ही बनेंगी।
- विदेशी निवेश: ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां अब भारत को दुनिया का नया ‘चिप हब’ मान रही हैं।
2. IT सेक्टर में संकट: Hiring में 24% की भारी गिरावट
जहाँ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी है, वहीं भारत का प्रमुख IT सेक्टर एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। एक ताजा रिपोर्ट (Xpheno) के मुताबिक, जनवरी 2026 की शुरुआत में टेक हायरिंग पिछले साल के मुकाबले 24% कम दर्ज की गई है।
- हायरिंग कम होने का कारण: कंपनियों का पूरा ध्यान अब Automation (स्वचालन) और Artificial Intelligence (AI) पर शिफ्ट हो गया है।
- फ्रेशर्स पर असर: रिपोर्ट के अनुसार, एंट्री-लेवल (फ्रेशर्स) की नौकरियों में सबसे ज्यादा कमी आई है, क्योंकि बुनियादी कोडिंग और डेटा एंट्री जैसे काम अब AI टूल्स आसानी से कर रहे हैं।
- बदलते स्किल्स: अब कंपनियां ‘जनरल कोडर’ के बजाय उन लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जिन्हें Generative AI और Cloud Computing की गहरी समझ है।
तुलनात्मक विश्लेषण (Quick Insight):
निष्कर्ष (Final Verdict):
2026 का भारत तकनीक के मामले में बहुत मजबूत हो रहा है, लेकिन करियर के लिहाज से यह साल ‘Skilling’ का है। यदि आप IT क्षेत्र में हैं, तो आपको पारंपरिक कोडिंग से हटकर AI टूल्स में महारत हासिल करनी होगी। वहीं, सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में आने वाले समय में लाखों नई नौकरियों की संभावना है।

